लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी:- लालबहादुर शास्त्री का जन्म 2-October-1904 को उत्तर प्रदेश के बनारस जिले के मुगलसराय में हुआ था । उनके पिताश्री का नाम शारदा प्रसाद था जो एक सरकारी स्कूल में मास्टर थे मगर जब लालबहादुर शास्त्री सिर्फ़ दो साल के थे तभी उनके पिताश्रीशारदा प्रसाद जी की मृत्यु हो गई जिसके बाद उनकी मां उन्हें उनके नाना के पास ले गईं । मिर्जापुर से शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए बनारस चले गए ।

वो जातिवाद के बिल्कुल खिलाफ थे इसीलिए उन्होंने कभी भी अपनी जाति अपने नाम में नहीं लिखी । बनारस के काशी विद्यापीठ से ग्रैजुएशन करने के बाद उन्हें शास्त्री की उपाधि दी गई । उन्होंने 1920 में ललिता देवी जी से शादी की और नज़ीर लेने से भी साफ मना कर दिया क्योंकि वह दहेज के बिल्कुल खिलाफ थे । शास्त्री जी के परिवार का आजादी के आन्दोलन से कोई लेना देना नहीं था मगर उनके एक टीचर थे । इस कामेश्वर प्रसाद मिश्रा जो बड़े देशभक्त थे उन्होंने आर्थिक रूप से शास्त्री जी की बहुत मदद भी की थी ।

इसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था मगर नाबालिग होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया । 1930 में शास्त्री जी कांग्रेस की एक इकाई के सेक्रेटरी बनाये गये और बाद में इलाहाबाद कांग्रेस कमेटी के प्रेसिडेंट बने । उन्होंने गांधीजी के नमक सत्याग्रह में भी अहम भूमिका निभाई । वो घर घर जाते थे और उनसे लगाना टैक्स ना देने के लिए कहते थे 1942 में क्विट इंडिया मूवमेंट यानि भारत छोड़ो आन्दोलन के समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था ।

इस दौरान वो कई समाज सुधारक और पश्चिमी फिल्म स्पर्श के बारे में भी पढें । आजादी के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश का पुलिस मंत्रालय सौंपा गया । उन्होंने बहुत अच्छा काम किया जिससे प्रभावित होकर नेहरूजी ने उन्हें भारत सरकार का रेल मंत्री बना दिया । मगर नवाज़ुद्दीन फिफ्टी सिक्स में तमिलनाडु में एक रेल एक्सीडेंट हुआ जिसमें लगभग डेढ़ सौ लोग मारे गए ।

इस हादसे का उनके ऊपर इतना बुरा असर पड़ा कि उन्हें लगा कि ये उन्हीं की गलती है और वो इस पद को संभालने के लायक नहीं है इसलिए उन्होंने रेलमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया । नवाजुद्दीन फिफ्टी सदन में वो वापस से यातायात और संचार मंत्री बनाए गए और फिर उन्हें कमर्शियल मिनिस्टर यानि व्यापार और उद्योग मंत्री बना दिया गया ।

सिद्दकी सिटी वन में उन्हें गृह मंत्री बनाया गया । नेहरूजी की मृत्यु के बाद नागार्जुन नवाजुद्दीन सिद्दीकी फोर को शास्त्री जी को नया प्रधानमंत्री चुना गया । हालांकि उस समय और भी कई बड़े कांग्रेसी नेता थे । प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वो बहुत साधारण स्वभाव के थे । उन्होंने कभी भी अपने पद का इस्तेमाल अपनी निजी जरूरतों के लिए नहीं किया ।

अपने परिवार के बहुत दबाव देने पर उन्होंने कार खरीदी थी । 12000 रुपये की कार के लिए पैसे पूरे नहीं पड़े थे । उन्होंने 7 हजार रूपए जमा किए और बाकी पैसों के लिए बैंक से लोन लिया । शास्त्री जी ने खाने की कमी बेरोजगारी और गरीबी को दूर करने के लिए कई कदम उठाए । भारत में भोजन की कमी दूर करने के लिए ग्रीन रिवोल्यूशन यानि हरित क्रांति और दूध और दूध से बनने वाले सामान की कमी पूरी करने के लिए वाइट रिवोल्यूशन यानि श्वेत क्रांति शास्त्रीजी के समय में ही आई थी ।

कैंटीन सिटी फाई में जब पाकिस्तान ने भारत से युद्ध छेड़ दिया तब उन्होंने सेना को जवाब देने के लिए आजाद कर दिया था और ये साफ साफ कह दिया था कि ताकत का जवाब ताकत से ही दिया जाएगा । इसी समय उन्होंने देश के किसानों और सैनिकों का हौसला बढ़ाने के लिए जय जवान जय किसान का नारा दिया था ।

युद्ध के समय की ही बात है कि अमेरिका ने भारत के ऊपर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि भारत युद्ध बंद कर दे वरना पीएल फोर्टी समझौते के तहत भारत को मिलने वाला गेहूं अमेरिका देना बंद कर देगा ।

उसी समय शास्त्रीजी ने अपने घर में शाम का खाना बनाने से मना कर दिया । कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं देखना चाहता हूं कि मेरा परिवार एक वक्त भोजन के बिना रह सकता है या नहीं अगर रह सकता है तो मैं कल ही देशवासियों से एक वक्त का खाना छोड़ने का आग्रह करूंगा ।

हम भूखे रह लेंगे मगर अमेरिका की धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे । शास्त्री जी को दिल की बीमारी थी और उन्हें पहले भी दो बार दिल का दौरा पड़ चुका था । तीसरी बार में कार्डियक अरेस्ट के कारण फौज जनवरी नवाजुद्दीन सिक्स को उनकी मृत्यु हो गई । हालांकि उनकी मृत्यु पर आज भी कई तरह के प्रश्न चिन्ह लगते हैं ।

ऐसा माना जाता है कि शायद उनकी मृत्यु किसी बीमारी से नहीं बल्कि एक सोची समझी साजिश से हुई थी मगर अभी तक इसका कोई भी सबूत खुले रूप से हमारे सामने नहीं है । अपनी मृत्यु के बाद भारत रत्न से सम्मानित किए जाने वाले शास्त्रीजी पहले भारतीय हैं । यह शास्त्री जी महान देशभक्तों काबिल और ईमानदार नेताओं की ही देन है कि न सिर्फ हमें आजादी मिली बल्कि आजादी के कुछ दशक के बाद ही हमारा देश आज दुनिया के सामने पहचान बना रहा है ।