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  • आज ब्रिटेन में बात होगी कृषि बिल पर जारी घमासान की ।

गुजरात हाईकोर्ट से सरकार को लगी फटकार की जानेंगे कि राहुल गांधी ने सरकार को क्यों सुनाई खरी खोटी और बिहार में पीएम मोदी के खुले पिटारे की ब्रांडिंग क्या करें बाद मजदूरों पर पड़ी मार की । लेकिन तमाम बड़ी खबरों से पहले एक ने जब सूखे पर संसद सत्र के पांचवें दिन मंत्रियों के वेतन और भत्ते का संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में लगी मुहर ।

लोकसभा पहले ही इस विधेयक को कर चुके पास दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को गरीब बच्चों को शिक्षा के लिए साधन और इंटरनेट मुहैया कराने के लिए निर्देश बेटियों की बढ़ी मुसीबत ।

  • गूगल प्ले स्टोर ने पेटीएम हैतो क्या डिलीट ।

गूगल ने पेटीएम पर लगाया नियमों का उल्लंघन करने का आरोप । कल से होगा आईपीएल के 13 वें सीजन का आगाज चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच का मुकाबला इस बार यूएई में खेला जा रहा क्या ।

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार सेंसेक्स 134 अंक की गिरावट के साथ 38 हजार 845 पर हुआ बंद । निफ्टी 11 जो गिरावट के साथ 11 हजार 504 पर वापस । सुर्खियों के बाद बात आज की सबसे बड़ी खबर की । केन्द्र की मोदी सरकार अन्नदाता के हित की बात कर ऐसा बिल लेकर आई है जिस पर संसद से लेकर सड़क तक बवाल मचा है ।

यहां तक कि मोदी सरकार की अपनी मंत्री उनके खिलाफ हो गई । बावजूद इसके सरकार नहीं झुकी अपने बहुमत का फायदा उठा कर लोकसभा में तो बिल पर मुहर लगवा ली लेकिन चुनौती है अब बिल को राज्यसभा से पास कराना इसी मुद्दे पर आज हमारे साथ चर्चा के लिए मौजूद राजू जी राजू जी आपका स्वागत है ।

  • लेकिन चर्चा शुरू करने से पहले देखिये क्या है बिल और विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध । ऐसे बिल का फायदा क्या जिसमें वो लोग ही खफा हो जायें जिनके लिए इसे तैयार किया गया है ।

सरकारी दावा करते हुए कृषि से जुड़े बिल लोकसभा में लाई किसी अन्नदाताओं को फायदा होगा । लेकिन सरकार के बिल के खिलाफ अन्नदाता सड़क पर उतर आया है । उसे इस बिल के फायदे कम नुकसान बेशुमार दिखाई दे रहे हैं । ऐसे बिल का क्या फायदा जिसपर सरकार के मंत्री ही साथ ना हो ।

सरकार की मनमानी अक्सर देश के लिए नुकसानदायक साबित होती है लेकिन मोदी सरकार ने कुछ नहीं सोचा कुछ नहीं समझा । बस अपनी धुन में ऐसे बिल को लोकसभा में पास करा दिए जो अन्नदाता के लिए फायदेमंद ही नहीं है । इसीलिए सड़क से लेकर संसद तक हंगामा बरपा हुआ है ।

नेताओं का गुस्सा फूट रहा है फिर चाहे वो सत्तापक्ष से हो या विपक्ष से कृषि संबंधी अध्यादेशों को कानूनी जामा पहनाने संबंधी विधेयकों पर विपक्ष तो विरोध जता ही रहा है बल्कि सरकार के सहयोगी ही तल्ख तेवर दिखा रहे हैं । यहां तक कि हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री पद त्याग दिया और सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है । हरियाणा में दुष्यंत चौटाला भी इसे लेकर मुश्किल में दिख रहे हैं ।

  • बीजेपी लगातार उन्हें समझाने में जुटी है लेकिन दुश्मन के ऊपर अन्नदाताओं का दबाव है कि वो भी हरसिमरत कौर की तरह फैसला ले और खट्टर सरकार से बाहर निकल आएं । कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया कि दोषी हरसिमरत कौर बादल के बाद आपको कम से कम उपमुख्यमंत्री पद से त्याग देना चाहिए था ।

आप किसानों से ज्यादा अपनी कुर्सी से जुड़े हैं इतना ही नहीं पौधे सुदर्शन दूसरे से खट्टर का साथ छोड़ने के लिए कहा है । बिल को लेकर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है । एक तरफ सरकार पक्ष विपक्ष के विरोध के घेरे में है तो वही अब अपने बचाव में भी उतर आई है।

बिल को लेकर केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा सरकार साफ नीयत के साथ बिल को लेकर आई है यह मतदाताओं के हित में है । साथ ही बिल का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए बोले कि जिनको राजनीत करना है वो राज्य कर सकते हैं । भारत सरकार कृषक के हित के लिए प्रतिबद्ध है ।

  • खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कृषि बिल का जिक्र करते हुए विपक्ष पर जमकर बरसे और कहा कि कुछ दल अन्नदाता को भ्रमित कर रहे हैं तो साफ जाहिर है कि सरकार को बिल के इस विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है ।

भारी विरोध के बावजूद केन्द्र सरकार अपने कदम पीछे खींचने के मूड में नहीं है लेकिन अब देखना होगा कि क्या सरकार बिलों को राज्यसभा में पास करवा पाती है या नहीं ।

  • राजीव जी सरकार न तो विपक्ष की सुन रही है और ना ही उन की जिनके फायदे के नाम पर इस तरह के बिल धांधली लाए जा रहे हैं और इसका असर भी दिख रहा है ।

आज देश का अन्नदाता सड़क पर है लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं है क्योंकि सरकार को अन्नदाताओं की परेशानी दिख ही नहीं रही है या फिर कुछ उद्योगपतियों के फायदे के लिए वो इसे देखना ही नहीं चाहती । जी आदिति सवाल में ही जवाब छिपा है कि सरकार केवल उद्योगपतियों के मुनाफे के बारे में सोच रही है तभी उसे अन्नदाताओं के दुख तकलीफ और नाराजगी दिखाई नहीं दे रहे हैं और अगर दिखते भी हैं तो सरकार उन्हें दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहती है क्योंकि मोदी सरकार की प्रतिबद्धता उद्योगपतियों के लिए नजर आ रही है ।

आम जनता के लिए तो बिल्कुल नहीं । इसीलिए सरकार अपने बहुमत की आड़ में लगातार ऐसे फैसले लेती है जिनपर मनमानी की छाप होती है और सितम ये कि सरकार दावा करती है कि ये सब आम जनता की भलाई के लिए है इस बात का आशय बिल के साथ भी ऐसा ही रवैया सरकार का है इस बिल का असर जिन अन्नदाताओं पर पड़ेगा उनसे अगर चर्चा करके सरकार विधेयक का मसौदा तैयार करती तो इस वक्त देश में ये बखेड़ा खड़ा नहीं होता ।

  • सरकार तब कह सकती थी कि उसने अन्नदाताओं की भलाई के लिए उनसे बात करके विधेयक तैयार किये हैं लेकिन अभी तो मामला बिल्कुल उल्टा है । सरकार इन विधेयकों के जरिये कृषि क्षेत्र में ऐसे बदलाव करना चाहती है जिससे आगे जाकर बड़ी पूँजी वाले उद्योगों को ही मुनाफा होगा ।

अन्नदाता उसी तरह ठगा जाएगा जैसे बंधुआ मजदूरी में होता है । सारी मेहनत अन्नदाता की होगी और उसकी फसल कोई और काटेगा । इसीलिए इतना विरोध हो रहा या देते मगर सरकार कह रही है कि ये सब अन्नदाताओं के हितों के लिए है । सरकार की कथनी और करनी का फर्क देश ने पहले भी कई बार देखा है आदित्य और एक बार फिर वही नजारा देश के सामने है ।

  • अब देखना ये है कि इस बार सरकार अपने पीछे कदम जो है वो पीछे लेती है या फिर उद्योगपतियों के लिए एक बार फिर आम जनता के हितों को दांव पर लगाती है । धन्यवाद राजीव जी तमाम जानकारी के लिए रुख करते हैं अपनी अगली खबर का ।

पहले तो सरकार प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए आगे नहीं आती है और जब उससे सवाल किया जाता है तो सरकार कहती है कि पता नहीं क्या इस सरकार के पास कोई जानकारी ही नहीं होती । इस मामले पर विपक्ष तो सरकार को घेरा ही है लेकिन अब गुजरात हाईकोर्ट ने भी केन्द्र सरकार को फटकार लगाई है तो क्या कहा है गुजरात हाईकोर्ट ने । देखिए रिपोर्ट में महामारी के दौर में केंद्र सरकार द्वारा अचानक लिए गए लोगोंं के फैसले ने कई जिंदगियां निगल डाली ।

  • प्रवासी मजदूर अपने घर जाना चाहते थे लेकिन उन्हें कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया गया और सैकड़ों किलोमीटर चलने भूख प्यास और गर्मी के कारण उनमें से कुछ प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई जिसे लेकर जब संसद में विपक्ष ने सरकार से सवाल किया तो बड़े ही गैर जिम्मेदाराना अंदाज में जवाब मिला ।

पता नहीं क्या इस सरकार के पास वो आंकड़े ही नहीं हैं कि कितने मजदूरों के घर जाते समय मौत हो गई । इस मसले को लेकर विपक्ष तो सरकार से सवाल कर रहा था कि अब गुजरात हाईकोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाई है । कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट मौतों और कोर्ट सकारात्मक मामलों के सही आकड़ों का खुलासा करना आवश्यक है ताकि लोग स्थिति की गंभीरता को समझने में सक्षम हो सकें । इससे निश्चित रूप से बड़े पैमाने पर समाज पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ेगा ।

  • इस पहलू को इस न्यायालय के । के रूप में राज्य सरकार द्वारा ध्यान देना चाहिए यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो सार्वजनिक हित में नहीं है । ये मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है । एक प्रसिद्ध वेब पोर्टल का दावा है कि सरकार के पास आकड़े हैं लेकिन फिर भी सरकारी नौकरियों को संसद में पूछे जाने पर नहीं बता रही है ।

ज़ाहिर है ऐसा करने पर सरकार खुद सवालों के कठघरे में आ जाएगी क्योंकि उस दौर में कई मजदूर बेमौत मारे गए हैं । अब देखना ये होगा कि विपक्ष के बाद अब गुजरात हाईकोर्ट से केंद्र कैसे निपटेगी । सरकार अब आकड़े जारी करेगी या यूं ही इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगी । सरकार तो कह चुकी है कि मार्च अप्रैल के बाद प्रवासी मजदूरों के साथ क्या हुआ इसकी उसे खबर नहीं । जाहिर सी बात है कि इस तरह के जवाब यदि होंगे तो सरकार पर उमिया उठेंगी ।

सरकार जब विपक्ष को मौका देगी तो विपक्ष चूकेगा भी नहीं और सरकार की असफलताओं को लेकर ही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उसे घेरा है तो क्या कहा है राहुल गांधी ने जेकेसीए पहले हाल ही में केंद्र सरकार ने संसद में कहा है कि उसके पास ऐसा कोई डाटा नहीं है जो बता सके कि देश में कितने स्वास्थ्य कर्मी महामारी की चपेट में आए हैं । अब इसी मसले पर विवाद खड़ा हो गया है । कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार से पूछा है कि उन बॉयस का इतना अपमान क्यों ।

  • राहुल गांधी ने पीएम मोदी की थाली बजाने वाली अपील को लेकर निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि प्रतिकूल जाता मुक्त मोदी सरकार थाली बजाने दीया जलाने से ज्यादा जरूरी है उनकी सुरक्षा और सम्मान ।

मोदी सरकार उन बैरियर्स का इतना अपमान क्यों । आपको बता दें कि संसद सत्र के चौथे दिन राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में महामारी के कितने स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं या फिर कितनों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है । अभी ये डेटा सरकार के पास नहीं है ।

इससे पहले पूर्ण बंदी के दौरान प्रवासी मजदूरों की जान जाने को लेकर भी केंद्र सरकार ने कहा था कि ऐसा डेटा उपलब्ध नहीं है जिस पर राहुल गांधी ने शायराना अंदाज में मोदी सरकार पर निशाना साधा था । गौरतलब है कि देश में स्वास्थ्य मुसीबत के खिलाफ लड़ाई फ्रंट पर स्वास्थ्य कर्मी ही लड़ रहे हैं । इस दौरान सैकड़ों डॉक्टर्स अपनी जान गवा चुके हैं और इस बीमारी की चपेट में आए हैं लेकिन जब केंद्र के पास कोई आंकड़ा ही नहीं है तो विपक्ष तो सवाल उठाएगा ही ।

  • राहुल गांधी भले ही सरकार से लगातार सवाल पूछ रहे हो लेकिन सरकार उन्हें जवाब नहीं दे रही । आप जबाब दे नहीं रही या जवाब है ही नहीं ये सोचने का विषय है । लेकिन इस समय सरकार कुछ और ही सोच रही है । बिहार में चुनाव करीब हैं तो ये समय बिहार की जनता के बारे में सोचने का है ।

चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले पीएम ने बिहार की जनता का दिल जीतने के लिए अपना पिटारा खोल दिया है । वो एक के बाद एक योजनाओं को हरी झंडी दिखा रहे हैं और उद्घाटन कर रहे हैं । एक बार फिर उन्होंने बिहार की जनता को सौगात दी है । बिहार में चली चुनाव की बयार नेता हो गये हैं तैयार ।

पीएम ने भी लगाई उद्घाटनों की बौछार । कुछ भी हो बिहार में फिर से आ जाए अपनी सरकार । बिहार में चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले जनता को लुभाने के लिए तरह तरह के पैंतरे आजमाए जा रहे हैं । बीजेपी इस बार बिहार में अपने वर्चस्व को बढ़ाने में लगी हुई है । जी हां इसी के तहत प्रधानमंत्री मोदी बिहार की जनता के लिए सरकार का खजाना खोल रहे हैं ।

  • बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कई बड़ी योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया । 18 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार को 5 सौ 16 करोड़ की लागत से बने कोसी रेल मेगा ब्रिज उद्घाटन किया |